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आजादी के 78 साल बाद भी प्यासा और बेबस तेलियाबांधी—न सड़क, न पानी, हर दिन संघर्ष की नई कहानी”

 संवाददाता पूजन मंडल फतेहपुर 


जामताड़ा जिले के फतेहपुर प्रखंड का तेलियाबांधी गांव आज भी उन अधूरी उम्मीदों की कहानी बयां करता है, जिनका वादा सालों से किया जाता रहा है। करीब 300 घरों की आबादी वाला यह गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है, मानो विकास की रफ्तार यहां आकर थम सी गई हो।

गांव तक पहुंचने के लिए आज भी पक्की सड़क का अभाव है। जो रास्ता है, वह सिर्फ एक कच्चा ट्रैक है, जो बरसात के मौसम में पूरी तरह कीचड़ और दलदल में बदल जाता है। हालात इतने खराब हो जाते हैं कि लोगों का घर से निकलना भी किसी जोखिम से कम नहीं होता। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है, बुजुर्गों की आवाजाही रुक जाती है, और किसी के बीमार पड़ने पर अस्पताल तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती बन जाता है।

वहीं दूसरी ओर, पानी की समस्या इस गांव की सबसे बड़ी पीड़ा बनकर सामने आई है। यहां के लोग आज भी पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं। महिलाओं और बच्चों को रोजाना कई किलोमीटर दूर तक जाकर पानी लाना पड़ता है। घंटों की मशक्कत के बाद ही कुछ पानी मिल पाता है। गर्मी के दिनों में हालात और भी भयावह हो जाते हैं, जब पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

स्थानीय ग्रामीण गोविंद टुडू, रोहन मरांडी, होपना टुडू, जितेंद्र हेंब्रम और मदन टुडू बताते हैं कि चुनाव के समय नेता गांव में आते हैं, बड़े-बड़े वादे करते हैं और वोट लेकर चले जाते हैं, लेकिन जीतने के बाद कोई पलटकर नहीं आता। सड़क न होने का सबसे बड़ा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है—बरसात में बच्चे स्कूल तक नहीं पहुंच पाते।

अब ग्रामीणों ने एक सुर में प्रशासन और सरकार से मांग की है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और जल्द से जल्द गांव में पक्की सड़क और पानी की व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें इस नारकीय जीवन से राहत मिल सके।

गांव में अब नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। तेलियाबांधी की यह तस्वीर विकास के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है—आखिर कब तक यह गांव यूं ही बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसता रहेगा?

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