(नाला) | संवाददाता
नाला प्रखंड अंतर्गत देवली कुंडागल की पावन धरती पर गुरुवार को आस्था, श्रद्धा और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब सर्बजानिन बजरंगबली मंदिर का बहुप्रतीक्षित प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव पूरे विधि-विधान, वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ भव्य एवं गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।
सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। दूर-दराज के गांवों से भी लोग इस पावन अवसर के साक्षी बनने पहुंचे। “जय श्री राम” और “बजरंगबली की जय” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 121 कुमारी कन्याओं द्वारा निकाली गई भव्य कलश यात्रा रही। देवलीश्वर शिव गंगा से जल भरकर पारंपरिक वेशभूषा में सजी कन्याओं की कतार जब गांव की गलियों से गुजरी, तो श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। सिर पर सजे कलश और गूंजते जयकारों ने पूरे क्षेत्र को एक विशाल धार्मिक उत्सव में तब्दील कर दिया।
मंदिर का निर्माण कार्य 28 मई 2020 को पूर्ण होने के बाद गुरुवार को शुभ मुहूर्त में भगवान बजरंगबली की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा कर मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए समर्पित किया गया। प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही यह मंदिर क्षेत्र में आस्था और आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख केंद्र बन गया है।
दिनभर चले धार्मिक अनुष्ठानों के बाद शाम को भव्य भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालु देर रात तक शामिल रहे। ढोल-नगाड़ों और मंजीरों की धुनों ने पूरे वातावरण को भक्तिरस में सराबोर कर दिया।
इस भव्य आयोजन के यजमान अजीत भट्टाचार्य एवं जमीनी चक्रवर्ती रहे, जिनके सहयोग और समर्पण से कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
आयोजन देवली कुंडागल सार्वजनिन समिति के तत्वावधान में किया गया, जिसमें स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
मौके पर मौजूद
अजित पाल, साधन दे, समीर नंदी, दानिनाथ कर, बिजय झा, लालटू दास, बबलू नंदी, शान्तो दास, रतन दास और शाम मंडल बापि कर सीटू कर रिजू कर सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

Post a Comment