पारंपरिक खेती से अलग राह चुनकर स्ट्रॉबेरी उत्पादन में हासिल की सफलता, जिले के किसानों के लिए बनीं प्रेरणास्त्रोत
शमीम अंसारी
संवाददाता जामताड़ा
जामताड़ा जिले के नारायणपुर प्रखंड अंतर्गत गोकुला गांव की रहने वाली मुसर्रत खातून ने अपने साहस, मेहनत और नवाचार के दम पर खेती के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है। कभी पारंपरिक खेती और घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली मुसर्रत आज “स्ट्रॉबेरी दीदी” के नाम से जानी जाती हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी है, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए एक नई दिशा भी है।
मुसर्रत खातून का जीवन पहले आम ग्रामीण महिलाओं की तरह ही था, जहां खेती पारंपरिक फसलों—जैसे धान और मकई—तक सीमित थी। आय के सीमित साधनों के कारण आर्थिक स्थिति में खास सुधार नहीं हो पा रहा था। ऐसे में उन्होंने कुछ नया करने की ठानी। इसी दौरान वह झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) से जुड़ीं और ‘गुलाब आजीविका सखी मंडल’ की सदस्य बनीं।
इस मंच से जुड़ने के बाद उन्हें आधुनिक खेती, बेहतर उत्पादन तकनीक और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी मिली। प्रशिक्षण और मार्गदर्शन ने उनके अंदर आत्मविश्वास पैदा किया और उन्होंने पारंपरिक खेती से हटकर कुछ अलग करने का निर्णय लिया।
नई सोच, नया प्रयोग
जिले में जहां अधिकतर किसान पारंपरिक फसलों की खेती करते हैं, वहीं मुसर्रत ने स्ट्रॉबेरी जैसी उच्च मूल्य वाली फसल को अपनाने का जोखिम उठाया। शुरुआत में यह फैसला आसान नहीं था। जलवायु, मिट्टी और बाजार को लेकर कई तरह की आशंकाएं थीं। साथ ही, इस फसल के लिए विशेष देखभाल और तकनीकी जानकारी की भी जरूरत थी।
इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और प्रशिक्षण में मिली जानकारी के आधार पर धीरे-धीरे अपनी खेती को आगे बढ़ाया। उन्होंने खेती के नए तौर-तरीकों को अपनाया और लगातार प्रयोग करते हुए उत्पादन में सुधार किया।
मेहनत लाई रंग, खेतों में दिखी सफलता
आज मुसर्रत खातून के खेतों में स्ट्रॉबेरी की अच्छी पैदावार हो रही है। उनकी फसल न केवल देखने में आकर्षक है, बल्कि गुणवत्ता के मामले में भी बेहतर मानी जा रही है। स्थानीय बाजार में उनके उत्पाद की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
जहां पहले पारंपरिक खेती से सीमित आमदनी होती थी, वहीं अब स्ट्रॉबेरी की खेती ने उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। इससे उनके परिवार के जीवन स्तर में भी सुधार आया है।
अन्य किसानों के लिए बनीं प्रेरणा
मुसर्रत खातून की सफलता अब केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं रह गई है। उनके प्रयासों से प्रेरित होकर गांव और आसपास के क्षेत्रों के अन्य किसान और महिलाएं भी नई फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। कई लोग उनके खेतों का दौरा कर खेती की तकनीक समझ रहे हैं और इसे अपनाने की कोशिश कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के नवाचार को बढ़ावा दिया जाए, तो जामताड़ा जैसे क्षेत्रों में भी उच्च मूल्य वाली फसलों के जरिए किसानों की आय में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
जिले को मिल रही नई पहचान
मुसर्रत खातून की पहल से जामताड़ा जिले को एक नई कृषि पहचान मिलने की संभावना बढ़ी है। स्ट्रॉबेरी जैसी फसल, जो आमतौर पर ठंडे क्षेत्रों में उगाई जाती है, उसका सफल उत्पादन यहां होना एक सकारात्मक संकेत है।
यह पहल न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा कर सकती है, बल्कि भविष्य में जिले को कृषि के क्षेत्र में नई पहचान भी दिला सकती है।
संदेश और प्रेरणा
मुसर्रत खातून की कहानी यह बताती है कि यदि सही दिशा, प्रशिक्षण और दृढ़ संकल्प हो, तो सीमित संसाधनों में भी बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि बदलाव की शुरुआत किसी भी छोटे गांव से हो सकती है।

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