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नाला में जेएसएलपीएस की दीदीयों ने तैयार किया 5 क्विंटल प्राकृतिक पलाश गुलाल, कई जिलों से मिल रहे ऑर्डर


नाला (जामताड़ा):
जेएसएलपीएस से जुड़ी दीदीयों ने नाला प्रखंड स्थित जेएसएलपीएस कार्यालय में इस वर्ष लगभग 5 क्विंटल पलाश फूल एवं विभिन्न प्राकृतिक सामग्रियों से अबीर और रंग-गुलाल तैयार किया है, ताकि इस साल होली प्राकृतिक रंगों के साथ मनाई जा सके।
दीदीयों ने बताया कि जामताड़ा जिले के साथ-साथ अन्य जिलों जैसे दुमका, देवघर और धनबाद से भी प्राकृतिक अबीर-गुलाल के ऑर्डर प्राप्त हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष अब तक लगभग 5 क्विंटल गुलाल तैयार किया जा चुका है, जो पूरी तरह प्राकृतिक रूप से निर्मित है।
गुलाल तैयार करने की प्रक्रिया में पलाश के फूलों को पहले सुखाया जाता है, फिर उसे बारीक छानकर उससे रंग निकाला जाता है। सुगंध के लिए कपूर मिलाया जाता है तथा आकर्षक रंग के लिए फूड कलर का उपयोग किया जाता है। इस प्रकार पूरी सावधानी के साथ अबीर तैयार किया जा रहा है।
अब तक तैयार किए गए अबीर-गुलाल को जामताड़ा जिले के नाला, कुंडहित, फतेहपुर, कर्माटांड़ और नारायणपुर सहित विभिन्न स्थानों पर आपूर्ति की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त अन्य जिलों से भी लगातार ऑर्डर प्राप्त हो रहे हैं। दीदीयों ने बताया कि वे आगे भी इस प्रकार का कार्य जारी रखेंगी।
प्राकृतिक रंगों के निर्माण से जेएसएलपीएस से जुड़ी दीदीयों को अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है, जिससे उनकी आमदनी में बढ़ोतरी हो रही है।
इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बीपीएम गणेश महतो ने बताया कि नाला के सखी मंडलों द्वारा पूरी तरह प्राकृतिक अबीर-गुलाल तैयार किया गया है। इसमें हरा, बैंगनी, पीला, लाल, नारंगी और पिंक सहित विभिन्न रंग तैयार किए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन रंगों में किसी भी प्रकार का केमिकल मिश्रित नहीं किया गया है, जिससे यह त्वचा के लिए सुरक्षित है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में बाजार में केमिकल युक्त रंग उपलब्ध हैं, लेकिन प्राकृतिक रूप से तैयार अबीर-गुलाल शरीर को हानि नहीं पहुंचाता और इसका रंग भी अधिक आकर्षक होता है।
उन्होंने बताया कि अब तक जामताड़ा जिले के छह प्रखंडों में 50-50 किलो अबीर-गुलाल की आपूर्ति की जा चुकी है तथा अन्य जिलों से भी ऑर्डर लगातार प्राप्त हो रहे हैं। होली निकट होने के कारण दीदीयाँ तेजी से रंग तैयार करने में जुटी हैं।
बीपीएम गणेश महतो ने यह भी कहा कि जामताड़ा जिले में जेएसएलपीएस का कार्य बेहतर ढंग से संचालित हो रहा है। पिछले वर्ष जिले को अच्छा नाम मिला था और इस वर्ष भी आशा है कि नाला प्रखंड की दीदीयों का नाम जिला से राज्य स्तर तक ऊंचा होगा।
उन्होंने बताया कि दीदीयों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाने के लिए अधिक से अधिक ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि वे अपने स्तर पर कार्य कर आत्मनिर्भर बन सकें और अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।

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