✍🏻 ज्ञानेंद्र तिवारी
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग केवल सफलता और भौतिक सुख-सुविधाओं की तलाश नहीं कर रहे, बल्कि मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और आत्मिक सुकून भी चाहते हैं। यही कारण है कि ऊर्जा उपचार और वास्तु जैसी प्राचीन भारतीय विधाओं के प्रति लोगों का विश्वास तेजी से बढ़ रहा है। इन्हीं विषयों पर ऊर्जा उपचारक एवं वास्तु विशेषज्ञ प्रीति कंधारी से विशेष बातचीत की गई। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश —
“मैंने इस कार्य को नहीं चुना, बल्कि मां ने मुझे चुना”
प्रीति कंधारी ने बताया कि ऊर्जा उपचार और वास्तु के क्षेत्र में उनका आना कोई सामान्य निर्णय नहीं था। उन्होंने कहा कि यह एक आध्यात्मिक यात्रा थी, जिसकी शुरुआत उनके गुरु से हुई मुलाकात के बाद हुई।
उन्होंने बताया कि एक हवाई यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात उनके गुरु से हुई। गुरु ने उन्हें देखते ही उनकी आत्मा और ऊर्जा को पहचान लिया। उस समय वह स्वयं अपनी शक्तियों और ज्ञान से पूरी तरह अनजान थीं।
प्रीति कहती हैं, “मेरे गुरु ने मुझे कुछ नया नहीं सिखाया, बल्कि मेरे भीतर पहले से मौजूद ज्ञान को जागृत किया। वह ज्ञान जो कई जन्मों से मेरे साथ था, लेकिन इस जीवन की भागदौड़ में धुंधला पड़ गया था। वह क्षण मेरे जीवन का मोड़ नहीं, बल्कि अपने वास्तविक स्वरूप में लौटने जैसा था।”
“जो सीख रही थी, वास्तव में उसे याद कर रही थी”
उन्होंने बताया कि गुरु से मिलने के बाद उन्हें यह एहसास हुआ कि वैदिक ज्ञान, तांत्रिक साधना और वास्तु से जुड़ी समझ पहले से उनकी आत्मा का हिस्सा रही है।
प्रीति ने कहा, “मुझे ऐसा महसूस हुआ कि मैं कुछ नया सीख नहीं रही, बल्कि वह सब याद कर रही हूं जो मेरी आत्मा पहले से जानती थी। यही कारण है कि मेरा कार्य केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुभव, साधना और आध्यात्मिक समझ पर आधारित है।”
“लोगों को अब केवल सफलता नहीं, शांति भी चाहिए”
ऊर्जा उपचार की बढ़ती लोकप्रियता पर उन्होंने कहा कि आज का व्यक्ति बाहर से सफल दिखाई देता है, लेकिन भीतर से थका हुआ और खाली महसूस करता है।
उन्होंने कहा, “आज दुनिया लोगों को सुविधा, आराम और करियर तो दे रही है, लेकिन मन की शांति नहीं दे पा रही। यही खालीपन लोगों को ऊर्जा उपचार की ओर खींच रहा है। जब कोई व्यक्ति पहली बार इसका अनुभव करता है, तो वह भीतर के बदलाव को महसूस करने लगता है।”
“अब लोग अपने भीतर की पीड़ा छिपाना नहीं चाहते”
प्रीति कंधारी का मानना है कि पहले लोग मानसिक और भावनात्मक संघर्षों पर खुलकर बात नहीं करते थे, लेकिन अब समाज बदल रहा है।
उन्होंने कहा, “एक पूरी पीढ़ी ‘सब ठीक है’ कहते-कहते भीतर से टूट गई। महामारी के दौर ने लोगों को अपने भीतर झांकने के लिए मजबूर किया। अब लोग अपनी भावनाओं को स्वीकार करने और उपचार की दिशा में आगे बढ़ने का साहस जुटा रहे हैं।”
“यह कोई चलन नहीं, बल्कि चेतना का विकास है”
उन्होंने कहा कि ऊर्जा उपचार और वास्तु कोई नया चलन नहीं है, बल्कि यह हमारी प्राचीन परंपरा और संस्कृति की वापसी है।
प्रीति के अनुसार, “लोग अब बाहरी उत्तरों से थक चुके हैं और अपने भीतर समाधान तलाश रहे हैं। वैदिक ज्ञान, ऊर्जा साधना और वास्तु हमारी जड़ों का हिस्सा हैं। अपनी जड़ों की ओर लौटना हमेशा भीतर की गहरी पुकार से जुड़ा होता है। यह केवल एक चलन नहीं, बल्कि चेतना का विकास है।”
आंतरिक उपचार की उनकी परिभाषा
प्रीति कंधारी के अनुसार आंतरिक उपचार का अर्थ है उन घावों को स्वीकार करना जिन्हें इंसान लंबे समय से नजरअंदाज करता आया है।
उन्होंने कहा, “जब व्यक्ति अपने भीतर के दर्द, भय और नकारात्मक भावनाओं को पहचानकर उन्हें मुक्त करता है, तभी वह अपने वास्तविक स्वरूप में लौट पाता है। एक स्वस्थ और संतुलित व्यक्ति केवल अपने लिए नहीं, बल्कि अपने पूरे वातावरण के लिए सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत बन जाता है।”
भविष्य में और बढ़ेगा ऊर्जा उपचार और वास्तु का प्रभाव
भविष्य को लेकर प्रीति कंधारी ने कहा कि आने वाले समय में ऊर्जा उपचार और वास्तु समाज के कई क्षेत्रों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेंगे।
उन्होंने कहा, “मैं ऐसा समय देख रही हूं जब भवन निर्माण से पहले उसकी ऊर्जा का भी ध्यान रखा जाएगा। मानसिक स्वास्थ्य की तरह ऊर्जा उपचार को भी गंभीरता से लिया जाएगा। यह ज्ञान केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हर उस व्यक्ति तक पहुंचेगा जो स्वयं को बेहतर बनाना चाहता है।”
उन्होंने अंत में कहा कि उनका उद्देश्य लोगों और इस प्राचीन ज्ञान के बीच एक मजबूत सेतु बनाना है, ताकि अधिक से अधिक लोग मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और संतुलित जीवन का अनुभव कर सकें।

एक टिप्पणी भेजें