जामताड़ा
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने प्रधानमंत्री के बयान पर कड़ा विरोध जताते हुए इसे पूरी तरह राजनीतिक करार दिया है।
फुरकान अंसारी ने कहा कि चुनाव के समय ही भाजपा नेताओं को पश्चिम बंगाल की याद आती है और चुनाव खत्म होते ही राज्य की समस्याओं को भुला दिया जाता है। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री को किसी राज्य को बदनाम करने के बजाय वहां की जनता के हित में सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पश्चिम बंगाल में “भय, भ्रष्टाचार और अराजकता” का माहौल होने तथा महिलाओं पर अत्याचार और घुसपैठ बढ़ने जैसे आरोपों को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इस तरह की भाषा प्रधानमंत्री पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।
फुरकान अंसारी ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री को वास्तव में पश्चिम बंगाल की चिंता है तो उन्हें आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति छोड़कर राज्य के विकास के लिए विशेष आर्थिक पैकेज और अतिरिक्त सहायता प्रदान करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल चुनाव के समय बंगाल की समस्याओं का जिक्र करना और बाद में उन्हें भूल जाना ठीक नहीं है।
उन्होंने प्रधानमंत्री के उस बयान पर भी सवाल उठाया जिसमें उन्होंने कहा था कि “बंगाल के लोगों को देखकर मुझे रोना आता है।” इस पर प्रतिक्रिया देते हुए फुरकान अंसारी ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री को सचमुच दुख और पीड़ा महसूस होती है, तो उन्हें हालात सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। आखिर वे पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं और पश्चिम बंगाल के लोगों की चिंता करना उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी है।
फुरकान अंसारी ने आरोप लगाया कि भाजपा बार-बार पश्चिम बंगाल को बदनाम करने की कोशिश करती है, जबकि वास्तविकता यह है कि बंगाल की जनता लोकतंत्र, सामाजिक सौहार्द और विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर देश के विकास के लिए काम करना चाहिए।
उन्होंने यह भी दावा किया कि आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा को पिछली बार से भी कम सीटें मिलेंगी। फुरकान अंसारी ने कहा कि इंडिया महागठबंधन पूरी तरह एकजुट है और बंगाल की जनता इस बार भी भाजपा को करारा जवाब देगी।

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