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13 दुधारू गायों को छुड़ाने डीसी दरबार पहुंचा बुजुर्ग, फरियाद सुन तुरंत हरकत में आया प्रशासन
जामताड़ा: जामताड़ा समाहरणालय में मंगलवार को आयोजित जनता दरबार उस वक्त भावुक हो उठा, जब बिहार के भोजपुर जिले से आए एक बुजुर्ग किसान अपनी पीड़ा लेकर डीसी आलोक कुमार के सामने पहुंचे। कांपती आवाज, नम आंखें और चेहरे पर साफ दिख रही बेबसी ने वहां मौजूद हर किसी को कुछ पल के लिए शांत कर दिया।
बुजुर्ग फरियादी ठाकुरजी यादव ने डीसी के सामने हाथ जोड़कर कहा कि उन्होंने वर्षों की मेहनत और कर्ज लेकर 13 दुधारू गायें खरीदी थीं। इन गायों के सहारे ही उनके परिवार का जीवन चल रहा था।
“गाय चली गई तो परिवार भूखा मर जाएगा…”
फरियादी ने रोते हुए बताया कि वाहन जांच के दौरान मिहिजाम क्षेत्र में उनकी सभी गायों को जब्त कर लिया गया। इसके बाद से उनका पूरा परिवार चिंता और परेशानी में जी रहा है।
उन्होंने भावुक होकर कहा,
“साहब… वही गाय हमारा सबकुछ है… उसी से घर चलता है… अगर वो नहीं मिली तो हम बर्बाद हो जाएंगे…”
अपनी बात कहते-कहते बुजुर्ग की आंखों से आंसू निकल पड़े। उनकी दर्द भरी आवाज सुनकर माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया।
डीसी आलोक कुमार ने तुरंत अधिकारियों को बुलाया
फरियादी की बात सुनते ही डीसी आलोक कुमार ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने तुरंत संबंधित अधिकारियों को बुलाकर पूरे मामले की जानकारी ली और आवश्यक दस्तावेजों की जांच करने का निर्देश दिया।
डीसी ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि कागजात सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार जल्द कार्रवाई कर फरियादी को राहत पहुंचाई जाए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि मामले में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
“गरीब और जरूरतमंद को परेशान नहीं होना चाहिए”
डीसी आलोक कुमार ने अधिकारियों से कहा कि किसी गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति को बेवजह परेशान नहीं किया जाना चाहिए। प्रशासन संवेदनशील तरीके से मामले को देखे और नियमों के तहत जल्द समाधान निकाला जाए।
डीसी के इस संवेदनशील रवैये के बाद बुजुर्ग किसान के चेहरे पर थोड़ी राहत जरूर दिखाई दी। लंबे समय से परेशानी झेल रहे फरियादी को पहली बार ऐसा लगा कि शायद अब उनकी बात सुनी जाएगी।
जनता दरबार में दिखा प्रशासन का मानवीय चेहरा
जनता दरबार में सामने आया यह दृश्य सिर्फ एक शिकायत भर नहीं था, बल्कि एक गरीब किसान के संघर्ष, दर्द और इंसाफ की उम्मीद की कहानी बन गया। एक तरफ बुजुर्ग की आंखों में बेबसी थी, तो दूसरी तरफ प्रशासन की तत्परता ने राहत की उम्मीद जगा दी।

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